हमारा दर्द भी कुछ यूँँ उभरता है ग़ज़ल बनके क़लम से अब उतरता है
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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सिमट कर रख लिया है याद को तुम ने सही में सही में शान को अपने कुशादा कर लिया क्या?
Raunak Karn
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रहे हैं ग़म सही में यार अपने बेघरी से अब हमारा दिल अभी बच्चा, इसे क्या फ़रवरी से अब
Raunak Karn
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तुम्हारे दूर जाते ही क़लम नज़दीक आती है तुम्हारा दूर जाना अब मुझे हरगिज़ नहीं खलता
Raunak Karn
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यही तो बात है 'रौनक' यहाँ तो दर्द रहता है यहाँ तो यार तेरा आँख भी अख़गर बदलता है
Raunak Karn
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उभरती है यहाँ तस्वीर कितनी अब उसी की याद दिल में यार आने पर
Raunak Karn
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