हमें गुलशन से गुल की आरज़ू थी मुसलसल खार मिलते जा रहे हैं
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
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इतनी जल्दी क्या रहती है मिलने की सूट गुलाबी और दुप्पटा काला है
Tanoj Dadhich
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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हमें गूंगा न समझा जाए कमतर बोलते हैं हम जहाँ हम को सुना जाए वहीं पर बोलते हैं हम
Bhaskar Shukla
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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
Charagh Sharma
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ज़रा सी रौशनी के वास्ते मुझ ऐसों को ख़ुद अपनी ज़ात ही में पहले जलना पड़ता है
Irshad 'Arsh'
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कुछ न करने के सौ बहाने हैं करना चाहो तो क्या नहीं होता
Irshad 'Arsh'
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नाम को ही ये छत और छप्पर होता है घर तो माँ के होने से घर होता है
Irshad 'Arsh'
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याद है मुझ को तेरे साथ वो बारिश का सफ़र अब अकेला हूँ मगर ख़ैर कोई बात नहीं
Irshad 'Arsh'
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किसी का आइना हो कर के देखो मियाँ सच बोलना आसाँ नहीं है
Irshad 'Arsh'
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