हर मोड़ पे दुनिया में ज़रा चलना सँभल कर शैतान यहाँ घूमते हैं भेस बदल कर
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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सोचते हुए मिरी हयात कट गई इल्म जब हुआ तो देखा रात कट गई
Arbab Shaz
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सोच कर जिस को दिल धड़कता है दिल की आवाज़ वो सुनी ही नहीं
Arbab Shaz
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ज़ख़्म भर जाए भी तो क्या हासिल दाग़ सा इक निशान रहता है
Arbab Shaz
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पहले तो ग़ौर से वो सुनी शा'इरी मिरी ता'रीफ़ कर रही है फिर आवाज़ की मिरी
Arbab Shaz
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वहम को क़स्दन हक़ीक़त के बराबर देखना ख़ुश्क सहरा में कभी पानी का मंज़र देखना
Arbab Shaz
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