इस उदासी से सन गए हम लोग और पत्थर के बन गए हम लोग
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सख़्ती थोड़ी लाज़िम है पर पत्थर होना ठीक नहीं हिन्दू मुस्लिम ठीक है साहब कट्टर होना ठीक नहीं
Salman Zafar
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है
Unknown
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सादा हूँ और ब्रैंड्स पसंद नहीं मुझ को मुझ पर अपने पैसे ज़ाया' मत करना
Ali Zaryoun
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ये तआक़ुब में फ़क़त अहल-ए-हवस हैं प्यारे ये भरम छोड़ कि उश्शाक़ बहुत हैं मेरे
Daqiiq Jabaalii
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ये सोचता ख़राब है कहता ख़राब है दावे से कह रहा हूँ ये बंदा ख़राब है
Daqiiq Jabaalii
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ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
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पत्थरों के बुतों में धड़कनें लाएँ कैसे बेवफ़ाओं को वफ़ा करना सिखाएँ कैसे
Daqiiq Jabaalii
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तुम ने 'अमित' परियों को देखा है कभी परियों के जैसे ही वो दिखती थी अमित
Daqiiq Jabaalii
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