इश्क़ अदब ये और सलीक़ा भी है उस में वो आप कहता है जिस को मैं तुम कहती हूँ
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मिलेंगी राह में दुश्वारियाँ ग़म और क्या क्या ही मुहब्बत आज़मानी है मुहब्बत कर के देखो तुम
Reshma Shaikh
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टूट गए सारे के सारे फूल यहाँ इक मेरे बालों का गजरा होने को
Reshma Shaikh
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तसल्ली कभी तो कभी आस देते ग़रीबी जिन्होंने गुज़ारी नहीं थी
Reshma Shaikh
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तड़पते रहे क़ब्र में लोग सारे जिन्हें बंदगी की ख़ुमारी नहीं थी
Reshma Shaikh
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अब तो ग़म है दोस्त मेरी ख़ुशियों से जमना मुश्किल है
Reshma Shaikh
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