जीत कर लंका हुए वापस अयोध्या राम और एक अरसे से बुझे दीपक सभी जलने लगे
Related Sher
राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
90 likes
इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
87 likes
मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है
Parveen Shakir
87 likes
अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
85 likes
मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
89 likes
More from Atul K Rai
ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
0 likes
नदी उस पार के साथी अकेले रो रहे होंगे निकल लेते हैं चल भाई अभी सब सो रहे होंगे बिछड़ने के दुखों पर ये ख़ुशी मरहम लगाएगी जो पागल कह रहे थे अब वो पागल हो रहे होंगे
Atul K Rai
0 likes
ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
0 likes
आँसू चाट रहे हैं अब की तिश्ना-लब हाँ ये बात अलग है दरिया दूर नहीं
Atul K Rai
0 likes
सब विदाई के वक़्त रोते हैं सोच उस वक़्त हँस रहा था मैं
Atul K Rai
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Atul K Rai.
Similar Moods
More moods that pair well with Atul K Rai's sher.







