जिन के होते हुए अँधेरा हो लाख लानत हो उन चराग़ों पर
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उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले
Jamal Ehsani
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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Faiz Ahmad Faiz
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
Varun Anand
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हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
Sahir Ludhianvi
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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शे'र होंटों पे रक़्स करते हैं हो अगर कोई हादसा मुझ में
Dard Faiz Khan
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ज़मीं की बात और न आसमाँ की बात करते हैं जहाँ हमारी फ़िक्र है वहाँ की बात करते हैं जहाँ गरीब को मिले न रोटी एक वक़्त की चलो अमीर ज़ादों हम वहाँ की बात करते हैं
Dard Faiz Khan
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पानी भी है, माहौल भी है, और हवा भी क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है
Dard Faiz Khan
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एक लम्हे को गुज़रने में लगी हैं सदियाँ जब किसी क़ैस को लैला से जुदा होना पड़ा
Dard Faiz Khan
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जान-ए-मन तुम वबाल करती हो लाल में भी कमाल करती हो जब पहन लेती लाल जोड़ा तुम फिर तो जीना मुहाल करती हो
Dard Faiz Khan
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