जिस के हाथों में ये ख़ंजर है अभी वो मिरी जाँ का मुक़द्दर था कभी
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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वो खड़ा है ग़ैर की चौखट पे जो वो हमारे दिल के अंदर था कभी
Sibgatullah Anwer
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ये सड़क गर तुझे बेहद सताती है तो तू आ जा तुझे मैं अपने घर रख लूँ
Sibgatullah Anwer
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वो मेरी है वो मेरी है फ़क़त मेरी ये बात सारी दुनिया को बताती है
Sibgatullah Anwer
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वो जिसे तुम ने अभी फंदा कहा उस गले का श्रेष्ठ जेवर था कभी
Sibgatullah Anwer
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राह में चलते हुए जो खो गया मेरी मंज़िल का वो रहबर था कभी जो नजारा तुम ने दिखलाया उसे वो मिरी आँखों का मंज़र था कभी
Sibgatullah Anwer
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