जो ज़ख़्म दर्द की तावील बन के आया था वो गोया सब्र की तकमील बन के आया था था अज़्म तो मेरा असहाबे-फी़ल सा लेकिन मेरा नसीब अबाबील बन के आया था
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मैं तुम्हें बद्दुआएं देता हूँ ताकि तुम मेरा दर्द जान सको तुम जिसे चाहते हो मर जाए और तुम उस के बा'द ज़िंदा रहो
Afkar Alvi
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
Ismail Raaz
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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सब्र आने की देर है वरना तू भी दिल से उतर ही जाएगा
Wajid Husain Sahil
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वो शख़्स जो नज़रों से बहुत दूर है लेकिन पहरो उसे तकता हूँ मैं ख़्वाबों में बुला कर
Wajid Husain Sahil
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यूँँ इन आँखों को तड़पने की सज़ा दी उस ने अपनी तस्वीर ही डीपी से हटा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
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वो हाथों से निकलते जा रहे हैं जिन्हें सर पे बिठाना चाहता हूँ
Wajid Husain Sahil
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खुल के मैदाँ में आ सकोगे क्या इतनी हिम्मत जुटा सकोगे क्या अपने पंजों के बल खड़े हो कर तुम मेरा क़द घटा सकोगे क्या
Wajid Husain Sahil
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