kai na-ashna chehre hijabon se nikal aae nae kirdar mazi ki kitabon se nikal aae
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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मुझ को समझ न पाई मिरी ज़िंदगी कभी आसानियाँ मुझी से थीं मुश्किल भी मैं ही था
Khushbir Singh Shaad
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अब अँधेरों में जो हम ख़ौफ़-ज़दा बैठे हैं क्या कहें ख़ुद ही चराग़ों को बुझा बैठे हैं
Khushbir Singh Shaad
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रगों में ज़हर-ए-ख़ामोशी उतरने से ज़रा पहले बहुत तड़पी कोई आवाज़ मरने से ज़रा पहले
Khushbir Singh Shaad
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ख़ुशियाँ देते देते अक्सर ख़ुद ग़म में मर जाते हैं रेशम बुनने वाले कीड़े रेशम में मर जाते हैं
Khushbir Singh Shaad
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