कैसे बदलेगी दशा एवं दिशा इस देश की चुन रहे नेता युवा जब क़ाफ़िलों को देख कर
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मेरे अंदर से आ जाओ बाहर गहमा-गहमी है एक बदन में दो लोगों को कैसे घर ले जाऊँगा
nakul kumar
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसे हमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी
Amjad Islam Amjad
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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कोई तो जादू है उन की ख़ूब-सूरत नज़रों में इक नज़र देखा है जब से ज़िंदगी रौशन हुई
Sani Singh
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लग रहा बेहद भला वो देखने में रूप से आँका गया है आदमी को
Sani Singh
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तुम्हारे वास्ते हम ने हजारों ठोकरें खाई मगर तुम सेे मिली हम को जुदाई और तन्हाई
Sani Singh
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सभी अरमान से जाएगा इक दिन बनाई शान से जाएगा इक दिन किसी को टूट कर के चाहता है वो लड़का जान से जाएगा इक दिन
Sani Singh
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किसी को याद हर पल कर रहा हूँ यक़ीनन ये मुसलसल कर रहा हूँ मुकम्मल हो नहीं पाई मुहब्बत सो अब ग़ज़लें मुकम्मल कर रहा हूँ
Sani Singh
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