तुम्हारे वास्ते हम ने हजारों ठोकरें खाई मगर तुम सेे मिली हम को जुदाई और तन्हाई
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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लग रहा बेहद भला वो देखने में रूप से आँका गया है आदमी को
Sani Singh
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कैसे बदलेगी दशा एवं दिशा इस देश की चुन रहे नेता युवा जब क़ाफ़िलों को देख कर
Sani Singh
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किसी को याद हर पल कर रहा हूँ यक़ीनन ये मुसलसल कर रहा हूँ मुकम्मल हो नहीं पाई मुहब्बत सो अब ग़ज़लें मुकम्मल कर रहा हूँ
Sani Singh
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सभी अरमान से जाएगा इक दिन बनाई शान से जाएगा इक दिन किसी को टूट कर के चाहता है वो लड़का जान से जाएगा इक दिन
Sani Singh
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कोई तो जादू है उन की ख़ूब-सूरत नज़रों में इक नज़र देखा है जब से ज़िंदगी रौशन हुई
Sani Singh
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