किसी को याद हर पल कर रहा हूँ यक़ीनन ये मुसलसल कर रहा हूँ मुकम्मल हो नहीं पाई मुहब्बत सो अब ग़ज़लें मुकम्मल कर रहा हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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सभी अरमान से जाएगा इक दिन बनाई शान से जाएगा इक दिन किसी को टूट कर के चाहता है वो लड़का जान से जाएगा इक दिन
Sani Singh
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तुम्हारे वास्ते हम ने हजारों ठोकरें खाई मगर तुम सेे मिली हम को जुदाई और तन्हाई
Sani Singh
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लग रहा बेहद भला वो देखने में रूप से आँका गया है आदमी को
Sani Singh
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कोई तो जादू है उन की ख़ूब-सूरत नज़रों में इक नज़र देखा है जब से ज़िंदगी रौशन हुई
Sani Singh
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कैसे बदलेगी दशा एवं दिशा इस देश की चुन रहे नेता युवा जब क़ाफ़िलों को देख कर
Sani Singh
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