kashish-e-lucknow are tauba phir wahi hum wahi aminabaad
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हँस के कहता है कि घर अपना क़फ़स को समझो सबक़ उल्टा मेरा सय्याद पढ़ाता है मुझे
Yagana Changezi
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दुनिया से अलग जा के कहीं सर फोड़ो या जीते ही जी मुर्दों से नाता जोड़ो क्यूँँ ठोकरें खाने को पड़े हो बेकार बढ़ना है बढ़ो नहीं तो रस्ता छोड़ो
Yagana Changezi
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सब्र करना सख़्त मुश्किल है तड़पना सहल है अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर
Yagana Changezi
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मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता
Yagana Changezi
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क्यूँँ किसी से वफ़ा करे कोई दिल न माने तो क्या करे कोई
Yagana Changezi
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