क़ीमतें बहुत बढ़ी दुकानों पे गुलाब की जब पता चला उसे गुलाब अच्छे लगते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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मैं बाल बाल बच गया हर बार इश्क़ से सर के बहुत क़रीब से पत्थर गुज़र गए
Umair Najmi
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बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं है, ये आँखों के लिए अच्छा नहीं है
Rahat Indori
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तश्त-अज़-बाम तो आज भी हूँ हाँ मैं बदनाम तो आज भी हूँ कुछ हो कोशिश मैं करता रहूँगा वरना नाकाम तो आज भी हूँ
Jagat Singh
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महीना जनवरी का सर्द तर मुझ को दिलाता याद उस की है जो इस मौसम में बाहर निकले तो हल्की गुलाबी सी हो जाती है
Jagat Singh
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तुम्हारा मेरी नाकामी से वाक़िफ़ होना बेहद ही ज़रूरी है तुम्हारा क़ामयाबी पर मेरी हैरान होने के लिए जानाँ
Jagat Singh
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वहीं पर मैं मरूँगा जिस जगह गाहे किसी को देख कर मुँह फेरा हो तू ने
Jagat Singh
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सो दफ़ा उस का नज़र-अंदाज़ करना बे-असर था एक हिचकी ने जगा रक्खी थी दिल में इतनी उम्मीद
Jagat Singh
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