khabar ke mod pe sang-e-nishan thi be-khabari thikane aae mere hosh ya thikane lage
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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शे'र अच्छे भी कहो सच भी कहो कम भी कहो दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो
Abdul Ahad Saaz
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दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
Abdul Ahad Saaz
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बुरा हो आईने तेरा मैं कौन हूँ न खुल सका मुझी को पेश कर दिया गया मेरी मिसाल में
Abdul Ahad Saaz
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आई हवा न रास जो सायों के शहर की हम ज़ात की क़दीम गुफाओं में खो गए
Abdul Ahad Saaz
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बचपन में हम ही थे या था और कोई वहशत सी होने लगती है यादों से
Abdul Ahad Saaz
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