ख़ुशी मेरी उसे कब यार ये तो रास आई है कहाँ नादान लड़की अब मिरे तो पास आई है मिरे तो ज़ेहन से यादें निकलती क्यूँँ नहीं उस की मगर क्यूँँ याद रहने साथ बारह-मास आई है
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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ये नज़र जो है तुम्हारी लड़कियों पर यार वो भी तो किसी की बेटियाँ हैं
Lalit Mohan Joshi
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फ़र्द-ए-बशर हो तुम फ़क़त क्यूँँ बोलते हो तुम सक़त मग़रूर हो ख़ुद इल्म में ये ऐब क्यूँँ लाए फ़क़त
Lalit Mohan Joshi
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सुनो ये सर्द रातों की दर्द बातें ख़मोशी से ये लब सिल जैसे गए हैं
Lalit Mohan Joshi
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प्यार की सब को ही तलब है यहाँ तो पर कभी क्या भूखे को खाना मिला है
Lalit Mohan Joshi
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सुनो यार ख़तरा वो अब टल गया मैं आख़िर जो उस के गले यूँँ लगा
Lalit Mohan Joshi
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