कुछ तो यादें भी थीं भीनी भीनी फोटो थी पुरानी ग़म के आँसू पलकों में ही रह गए फिर आते आते
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मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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तेरे जाने के बा'द बस यादें हर तरफ़ याद-याद बस यादें सोना, चाँदी, जमीन, घर सब कुछ हैं मेरी जायदाद बस यादें
Sandeep Thakur
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हम ने दुनिया की तरफ़ देखा नहीं तुम को चाहा और कुछ सोचा नहीं
Aalok Shrivastav
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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ये हुनर भी लिखने का मुझ में तो नहीं था पर इश्क़ जो भी करते हैं शा'इरी ही करते हैं
Naresh sogarwal 'premi'
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ये हमदर्दी तो मानव को बना देती है बेचारा करो तारीफ़ मेरी ज़ख़्म की ही क्यूँ न हो चाहे
Naresh sogarwal 'premi'
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सहीह से मैं तो अपना रंज-ओ-अलम दिखा भी नहीं पाया अगरचे मैं ने वो सब किया जो जुदाई में लोग करते हैं
Naresh sogarwal 'premi'
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तुम को भी एहसास हो मुझ को हमेशा खोने का बीते लम्हों में मुझे तुम रोज़ ही देखा करो
Naresh sogarwal 'premi'
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क्यूँँ हैं मुझ से ये ग़म-ग़ुसार ख़फ़ा कि मैं तो यारो दर्द लिखता हूँ
Naresh sogarwal 'premi'
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