sherKuch Alfaaz

kuchh roz nasir aao chalo ghar mein raha jae logon ko ye shikwa hai ki ghar par nahin milta

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ऐ मेरी ज़िंदगी ऐ मेरी हम-नवा तू कहाँ रह गई मैं कहाँ आ गया कुछ न अपनी ख़बर कुछ न तेरा पता तू कहाँ रह गया मैं कहाँ आ गया सब्ज़ शाख़ों से गुल यूँँही चुनना कभी गुल से गुलज़ार के ख़्वाब बुनना कभी फ़ुर्सत-ए-इब्तिदा हसरत-ए-इंतिहा तू कहाँ रह गई मैं कहाँ आ गया

Naseer Turabi

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हर शाम इक मलाल की आदत सी हो गई मिलने का इंतिज़ार भी मिलना सा हो गया

Naseer Turabi

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हम-रही की बात मत कर इम्तिहाँ हो जाएगा हम सुबुक हो जाएँगे तुझ को गिराँ हो जाएगा

Naseer Turabi

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ये हवा सारे चराग़ों को उड़ा ले जाएगी रात ढलने तक यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा

Naseer Turabi

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मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता

Naseer Turabi

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