लगती है बहुत ख़ाली से अब ये मेरी आँखें काजल से कहो कोई मेरी आँख में आए
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Mirza Ghalib
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वो इक गली जिसे छोड़ हुए मुझे बरसों न जाने क्यूँ मेरे ख़्वाबों में रोज़ आती है
Dipendra Singh 'Raaz'
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उस ने कहा के याद न आना मुझे कभी सो मैं दुआएंँ कर रहा हूँ मौत की मेरे
Dipendra Singh 'Raaz'
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सुनहरे ख़्वाबों से जिस मकाँ को सजाया था हम ने मिल के बरसों हमारे ख़्वाबों के उस मकाँ को लगा दी है आग ख़ुद ही उस ने
Dipendra Singh 'Raaz'
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ना-मुकम्मल फिर हुई मेरी ग़ज़ल शे'र फिर तन्हा हुआ, मेरी तरह
Dipendra Singh 'Raaz'
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होते हुए तुम्हारे भी तरसे हैं प्यार को सूखा रहा है शहर ये बारिश के बा'द भी
Dipendra Singh 'Raaz'
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