लिखें कैसे कि इच्छा मर चुकी है हमारी डाइरी भी भर चुकी है दुआ अब जितनी मर्ज़ी कर ले कोशिश बला ये काम अपना कर चुकी है
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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कौन डुबाएगा दरिया में हम को ख़ुद पर राम लिखेंगे तर जाएँगे
Rohit Gustakh
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कैसे किसी की याद हमें ज़िंदा रखती है एक ख़याल सहारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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हूँ यूँँ टूटा नहीं था जानता मैं मुझे मेरी हँसी से ख़ुश लगा मैं उसे मिलना तो था बेबाक होकर वो आई सामने तो बिछ गया मैं
Aman Mishra 'Anant'
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प्रेम की बात जब भी होती है दिल में इक बे-दिली सी होती है तुम जो सो पाओ तो बता देना चैन की नींद कैसी होती है
Aman Mishra 'Anant'
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अपने हाथों को बना पतवार जाते राम का ले नाम दरिया पार जाते हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया मान लेते हार तो फिर हार जाते
Aman Mishra 'Anant'
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किस लिए नाराज़ तुम हो बे-वफ़ा दिलजलों का नाज़ तुम हो बे-वफ़ा मीर जाफर एक था बंगाल में एक धोखेबाज़ तुम हो बे-वफ़ा
Aman Mishra 'Anant'
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रोज़ रोने के बहाने ढूँढ़ते है बेबसी से अपने रिश्ते ख़ून के है देख लेंगे फिर ग़लत क्या है सही क्या आ अभी इक दूसरे को चूमते है
Aman Mishra 'Anant'
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