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लिखें कैसे कि इच्छा मर चुकी है हमारी डाइरी भी भर चुकी है दुआ अब जितनी मर्ज़ी कर ले कोशिश बला ये काम अपना कर चुकी है

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हूँ यूँँ टूटा नहीं था जानता मैं मुझे मेरी हँसी से ख़ुश लगा मैं उसे मिलना तो था बेबाक होकर वो आई सामने तो बिछ गया मैं

Aman Mishra 'Anant'

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प्रेम की बात जब भी होती है दिल में इक बे-दिली सी होती है तुम जो सो पाओ तो बता देना चैन की नींद कैसी होती है

Aman Mishra 'Anant'

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अपने हाथों को बना पतवार जाते राम का ले नाम दरिया पार जाते हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया मान लेते हार तो फिर हार जाते

Aman Mishra 'Anant'

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किस लिए नाराज़ तुम हो बे-वफ़ा दिलजलों का नाज़ तुम हो बे-वफ़ा मीर जाफर एक था बंगाल में एक धोखेबाज़ तुम हो बे-वफ़ा

Aman Mishra 'Anant'

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रोज़ रोने के बहाने ढूँढ़ते है बेबसी से अपने रिश्ते ख़ून के है देख लेंगे फिर ग़लत क्या है सही क्या आ अभी इक दूसरे को चूमते है

Aman Mishra 'Anant'

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