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मैं जो रोया उमीद टूटी है दिल तो टूटा है मेरा पहले भी

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ज़ेहन-ओ-दिल में मेरे पेच है इक फँसी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी इश्क़ है तुझ सेे या है महज़ दिल-लगी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी ये तअल्लुक़ भी आसाँ नहीं हम-सफ़र मोड़ आने हैं आएँगे आगे मगर घर पलटने का ये मोड़ है आख़िरी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी

Mohit Dixit

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उन सेे कह दो कहानियाँ न कहें मैं कहानी में जैसे था ही नहीं

Mohit Dixit

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गईं जो सर्दियाँ दरख़्त सूखने लगे हवा भी चीखने लगी ये दिन उदास हैं इन्हीं दिनों की इक सहर जुदा हुए थे हम इसीलिए तो आज भी ये दिन उदास हैं

Mohit Dixit

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यहाँ तक आने से पहले ये हम भी सोचते थे ये लोग नाचते क्यूँँ हैं उदास गानों पर

Mohit Dixit

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अपने रंगों उमंगों भरे आस्माँ पर जैसे बे-रंग बादल कोई छा चुका है मेरी नम आँखों पर क्यूँँ परेशान हो तुम यार इन में तो सैलाब तक आ चुका है

Mohit Dixit

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