मैं तो उन को जाने कब का भूल गया वो जो जिन के गालों पर तिल काला था यारो लेकिन भूल न पाया आज तलक उस को जिस के सीने में दिल काला था
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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उड़ानें ऊंँची भरते हैं वो जिन के पर नहीं होते जो अक्सर घर बनाते हैं उन्हीं के घर नहीं होते
SHIV SAFAR
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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तुम्हें इन बाहों में भरकर ख़ुशी से झूम लूॅंगा मैं अगर तुम ने जो कुछ पूछा क़सम से चूम लूॅंगा मैं
SHIV SAFAR
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साँसों की रेलगाड़ी ठहरना है चाहती ज़ंजीर मेरी ज़िंदगी की खींच दे कोई
SHIV SAFAR
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मेरी साँसें ये नहीं अब जैसे कोई आह हुई तेरी याद आई मेरी ज़िंदगी तबाह हुई
SHIV SAFAR
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