मसअले के तोड़ में नया ही मसअला ये तो मेरे मसअले का हल नहीं हुआ
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़िंदगी से सब को कुछ तो चाहिए तू मगर वो है जो सब को चाहिए साथ तेरे एक दिन ही काफ़ी है इतनी लंबी उम्र किस को चाहिए
Amit Rajvanshi 'Guru'
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सारे जहाँ का नूर भी फीका लगे वो कान पर इक लट लगा ले काफ़ी है
Amit Rajvanshi 'Guru'
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सब बताना पड़ रहा है दिल दुखाना पड़ रहा है मेरा दुख ये है कि मुझ को मुस्कुराना पड़ रहा है
Amit Rajvanshi 'Guru'
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सामना करता हूँ सौ सवालों का मैं आप तो मुस्कुरा कर चले जाते हैं
Amit Rajvanshi 'Guru'
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सह लिए ग़म घुटन सह नहीं पाए ख़ुद-कुशी तब की जब कह नहीं पाए
Amit Rajvanshi 'Guru'
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