masruf hain kuchh itne ki hum kar-e-mohabbat aaghaz to kar lete hain jari nahin rakhte
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं तो ऐ इश्क़ तेरी कूज़ा-गरी जानता हूँ तू ने हम दो को मिलाया तो बना एक ही शख़्स
Abbas Tabish
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मुझ को उस की आँखों में कूदने की आदत है मैं तुम्हें बताऊँगा ख़ुद-कुशी के बारे में
Abbas Tabish
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यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे ये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश' ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे
Abbas Tabish
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इसीलिए तो किसी को बताने वाला नहीं कि तेरा मेरा तअल्लुक़ ज़माने वाला नहीं पलट के आ ही गए हो तो इतना ध्यान रहे तुम्हारा दोस्त हूँ लेकिन पुराने वाला नहीं
Abbas Tabish
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आदतन उस के लिए फूल ख़रीदे वरना नहीं मालूम वो इस बार यहाँ है कि नहीं
Abbas Tabish
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