मत पूछ हम से हाल-ए-दिल अज़ीज़ाँ शब-भर से यादों में जला हुआ है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तू ने ग़ैरों की कही बातें सुनी अपना सच हम से सुनाना रह गया
Rizwan Khoja "Kalp"
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उम्र भर मैं ने की है इबादत तिरी इश्क़ की तब हुई है इनायत तिरी
Rizwan Khoja "Kalp"
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रौशनी मत कर चराग़ों के सहारे कर उजाला नूर-ए-ईमाँ को जला कर
Rizwan Khoja "Kalp"
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शोहरत क्या बख़्शेगी हमें दुनिया जो ख़ुद नाकारी है
Rizwan Khoja "Kalp"
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शाना-ब-शाना हैं खड़े दर पे तिरे छोटा बड़ा कोई नहीं दरबार में
Rizwan Khoja "Kalp"
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