मिरे बदन पर उस की काली नज़रें बिल्कुल वैसी थीं जैसे बच्चों के हाथों में काला धागा होता है
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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होगा कोई ऐसा भी कि 'ग़ालिब' को न जाने शाइ'र तो वो अच्छा है प बदनाम बहुत है
Mirza Ghalib
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे अब इंतिज़ार आप का कोई करे! करे! मैं ने तो यूँँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!
Balmohan Pandey
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ये किस का अक्स है हर सू समाया छुपा है कौन मेरी पुतलियों में
Shiva awasthi
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मुझ को तो अच्छे लगते हैं दुविधा पीर उदासी आँसू
Shiva awasthi
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कोई जो आएगा तो फिर समेट ही लेंगे अभी तो ख़ुद को बिखेरे हुए हैं कमरे में
Shiva awasthi
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नदी मिरे भोले साजन के गालों को छू कर बतलाना दूर किनारे खड़ी तुम्हारी सजनी बोसा भेज रही है
Shiva awasthi
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जितनी चहल पहल दोपहरी उतनी ख़ाली ख़ाली शाम सुरसा जैसी तन्हाई ने लो फिर मेरी खा ली शाम
Shiva awasthi
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