मेरी फ़ितरत में थी पहले से ही ये ख़ामोशी मुझ को ख़ामोश ही कर डाला है ये नीश-ए-इश्क़
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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तस्फ़िया-नफ़्स को करें हासिल हर दुआ पर ख़ुदा कहेगा कुन
A R Sahil "Aleeg"
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रहम करो निजी मुआमला का रंग तो न दो जो शे'र हैं फ़क़त वो शे'र ही हैं और कुछ नहीं
A R Sahil "Aleeg"
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मैं भी अब टूट कर आइने सा गया हूँ बिखर इश्क़ में जब से फेरी हैं तुम ने निगाहें सनम
A R Sahil "Aleeg"
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मुझ पर ये ज़ुल्म-ए-हुस्न कोई कम नहीं यहाँ बोसे की ख़्वाहिशात शिकायत के साथ साथ इस आशिक़ी ने मुझ को सुख़न-वर बना दिया मैं शे'र कह रहा हूँ मुहब्बत के साथ साथ
A R Sahil "Aleeg"
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रात फिर से ख़्वाब में आई थी वो ज़ख़्म सारे इश्क़ के रिसने लगे
A R Sahil "Aleeg"
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