'mir' ji ishq mana ki neamat nahin par main is ko bala bhi nahin manta manta hun khuda-e-sukhan bhi tumhein aur hukm-e-khuda bhi nahin manta
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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रुकें तो धूप से नज़रें बचाते रहते हैं चलें तो कितने दरख़्त आते जाते रहते हैं
Charagh Sharma
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जो लोग ख़ुद न करते थे होंठों से पान साफ़ पलकों से कर रहे हैं तेरा पायदान साफ़
Charagh Sharma
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बनाओ ताजमहल के ब-जाए ताश महल तमाम उम्र मुहब्बत करो गिराओ बनाओ
Charagh Sharma
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इस दिल की ईंट ईंट तेरे बा'द हिल गई तू चल दिया तो इश्क़ की बुनियाद हिल गई
Charagh Sharma
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तुझे बहुत शौक़ था मोहब्बत की गर्म लपटों से खेलने का ले जल गई न हथेली अब ख़ुश कहा था मैं ने चराग़ रख दे
Charagh Sharma
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