mithi baaten, kabhi talkh lahje ke tir dil pe har din hai un ka karam bhi naya
sherKuch Alfaaz
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
Khurram Afaq
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सिगरेट की शक्ल में कभी चाय की शक्ल में इक प्यास है कि जिस को पिए जा रहे हैं हम
Ameer Imam
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कभी तो कोसते होंगे सफ़र को कभी जब याद करते होंगे घर को निकल पड़ती हैं औलादें कमाने परिंदे खोल ही लेते हैं पर को
Siddharth Saaz
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