मिल के ग़ैरों से मुझ को जलाता रहा जिस को अक्सर मैं अपना बताता रहा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
Shivam Mishra
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ऐ ज़माने मुझे यूँँ न बदनाम कर हो सके तो मुझे उन के ही नाम कर
Shivam Mishra
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आशियाँ दिल को तेरे बनाए हैं हम तोड़ कर इस को बेघर है होना नहीं
Shivam Mishra
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ख़ास कुछ भी नहीं अब मेरे पास है चीख़ने का ख़मोशी में एहसास है
Shivam Mishra
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जो धोखा मिल गया हो तो मोहब्बत तीर लगती है मिली जो नइंँ वफ़ा हम को तो ये तक़दीर लगती है कि रानी है किसी की वो कहानी थी किसी की वो मैं रांझा बन नहीं पाया मगर वो हीर लगती है
Shivam Mishra
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