मिरे ही वास्ते लाया है दोनो फूल और ख़ंजर मुझे ये देखना है बस वो पहले क्या उठाता है
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उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी
nakul kumar
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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ये जो है फूल हथेली पे इसे फूल न जान मेरा दिल जिस्म से बाहर भी तो हो सकता है
Abbas Tabish
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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
Parveen Shakir
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उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले
Jamal Ehsani
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सभी रिश्तें मैं यूँँ बचाए हूँ जैसे तड़पते दियों को हवा देते रहना
Parul Singh "Noor"
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जो सारे ज़ख़्म मेरे भर दिया करता उसी के नाम का ख़ंजर बनाया है
Parul Singh "Noor"
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हुआ टुकड़े वहम जब ये कहा उस ने तुम्हीं सब कुछ हो लेकिन मेरा इश्क़ नहीं
Parul Singh "Noor"
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आसमाँ से गरज छेड़ती है हमें एक बारिश में भी भीगे थे साथ हम
Parul Singh "Noor"
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मिरा नज़दीक से छू कर गुज़र जाना पलट कर उस का मुझ को कहना महबूबा
Parul Singh "Noor"
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