मुहब्बत, वस्ल, नफ़रत, हिज्र, रेहलत सब मिले हैं तो मैं जा कर अब मुकम्मल हूँ
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कबूतर को पता है घर तुम्हारा मिलेगा छत पे तुम को ख़त हमारा
Aqib Jawed
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नाप रहा था एक उदासी की गहराई हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई
Tanoj Dadhich
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पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से पर जी रहे हैं और भी हम इत्मीनान से
Ankit Maurya
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जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
Jaun Elia
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झूठ है सब, ज़हीन धोका है इस नज़र का यक़ीन धोका है टूट जाएगा दिल तो समझोगे ये मुहब्बत हसीन धोका है
Sandeep Thakur
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यक़ीं मानो कि वो अब भी मुहब्बत करती है मुझ सेे यक़ीं ये भी करो यारा कि मैं अब झूठ कहता हूँ
Piyush Nishchal
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यकायक मरना है तो ख़ुद-कुशी कर लो अगर क़िस्तों में तो फिर दिल-लगी कर लो नहीं मरना है ज़िंदा भी नहीं रहना मिरी मानो तो तुम फिर मयकशी कर लो
Piyush Nishchal
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तुम्हारे होंठ पर इक तिल को देखा तो लगा मुझ को कि इस को पढ़के तेरे इश्क़ में नायाब हो जाऊँ
Piyush Nishchal
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वो जब आती है तो धोखे की बू आती है उस को शायद कोई जी भर के चूमा होगा
Piyush Nishchal
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सिखाया था जिसे मैं ने मुहब्बत में वफ़ा करना वो लड़की इश्क़ में अब ख़ुद को फ़रज़ाना समझती है
Piyush Nishchal
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