मुझ को उजालों से रहा है ख़ौफ़ के संगीन अँधेरा छुपाए है रख़े
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदा रहा मैं आज भी यारों ग़ज़ब की बात है मज़लूम है बख़्शा गया क्या ख़ूब-सूरत रात है
Zain Aalamgir
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यूँँ ज़ोर से ना दे दुहाई, ज़ुल्म सहता शख़्स तू रूठे ख़ुदा ना और भी, तेरा ख़ुदा है सो रहा
Zain Aalamgir
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ये शहर शोर-शराबा बहुत सुनाता है मगर पुकारूँ किसे तो सुकूत काफ़ी है
Zain Aalamgir
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थी दुआएँ इस हथेली पर लिखी, अब धुंदली है वजह है आँसू, कि सब मिटते चले जाते मुसलसल
Zain Aalamgir
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तोलकर देखा तराज़ू में सभी कुछ डालकर जो सब मुक़ाबिल एक आँसू के मुझे हल्का दिखा है
Zain Aalamgir
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