मुसलसल रो रहे हैं इन दिनों हम हमें किलकारियाँ मँहगी पड़ी हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ख़ुद से मिलने का वक़्त मिल जाए तेरे बारे में तब मैं सोचूँगा
Khalid Azad
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हमें दरकार है फिर इक सफ़र की ज़रा सा काम बाक़ी रह गया है
Khalid Azad
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मैं भी तो इसी ख़ाक से तामीर हुआ हूँ मुझ में भी कई रंग ज़माने के मिलेंगे
Khalid Azad
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ख़्वाब में मुझ को अक्सर सहरा दिखते हैं लगता है अब ऑंखें फूट के रोएगी
Khalid Azad
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हमें सुनाओ कहानी उदास लोगों की हमारा दिल तो इसी से हरा भरा होगा
Khalid Azad
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