na hum wahshat mein apne ghar se nikle na sahra apni virani se nikla
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मुझ से रस्तों का बिछड़ना नहीं देखा जाता मुझ से मिलने वो किसी मोड़ पे आया न करे
Kashif Husain Ghair
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इन मकीनों का सुलूक अपनी जगह दर-ओ-दीवार पे हैरत है मुझे
Kashif Husain Ghair
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वो हाल था कि बस मिरा उठना मुहाल था लेकिन फिर एक ख़्वाब की तकमील से उठा
Kashif Husain Ghair
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हमारी सुब्ह किसी शाम से नहीं मिलती ये वो थकन है जो आराम से नहीं मिलती
Kashif Husain Ghair
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हाल पूछा न करे हाथ मिलाया न करे मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया न करे
Kashif Husain Ghair
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