न पूछो कैफ़ियत अब तो हमारी तुम हमारी हम सँवारेंगे तुम्हारी तुम चले हैं अपने अपने रास्तों पर जब ये झूठे सिलसिले रखना न जारी तुम
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
Sanjay Bhat
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ज़िन्दगी चल नज़र खोल के चल दिल में ईमान को घोल के चल दोस्त हर कोई फिर तेरा होगा प्यार से सब से तू बोल के चल
Sanjay Bhat
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तन्हाई में यूँँ तन्हा मैं नज़र आया हूँ मैं जैसे मैं नहीं उजड़ा कोई साया हूँ
Sanjay Bhat
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तराश मुझ को कि कोई मिरा सिरा निकले सिरा दिखे जो अगर कोई सिलसिला निकले वो सिलसिला हो तिरी मेरी ज़िंदगानी का अगर जो निकले तो हर लफ़्ज़ हर गिला निकले
Sanjay Bhat
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फिर से मक़्तल में बहाएा है लहू क़ातिल का फिर ये उम्मीद है अब कोई न मारा जाए
Sanjay Bhat
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