नीम बिस्मिल हवा आरज़ी तौर पर साँस लेती रही सांँवला एक मौसम दरख़्तों की शाख़ों पे रक्खा रहा
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी
Zubair Ali Tabish
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लेता नहीं जो साँस भी इक बार चैन से करता रहा है गुफ़्तगू बीयर की कैन से
nakul kumar
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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ज़ख़्म फिर हँस दिया पुराना कोई आज अश्कों ने फिर बग़ावत की
Moni Gopal Tapish
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तू समझ सके कभी मुझ को मेरी निगाह से, कभी यूँँ भी हो कि ये ख़्वाब था मेरी आँख में, गई रात चुपके से मर गया
Moni Gopal Tapish
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तू कि रौशन दिए की महक की तरह,सर्द रातों के दिल में लहकता हुआ मैं कि सूरज का टुकड़ा मगर बुझ गया, शाम के दर पे आख़िर सिसकता हुआ
Moni Gopal Tapish
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वो बिकाऊ नहीं उस की कोई मजबूरी है पेट की भट्टी का ईंधन ही बहुत महँगा है
Moni Gopal Tapish
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मेरी फ़ितरत नहीं भूल जाऊँ उसे जो मुक़द्दर में मेरे लिखा ही न हो लाख हक़ में न हो पर मुझे चाहिए आसमानों का रुख़ वो दहकता हुआ
Moni Gopal Tapish
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