निकहत-ए-पैरहन से उस गुल की सिलसिला बे-सबा रहा मेरा
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
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अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
Jaun Elia
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बस यूँँ ही मेरा गाल रखने दे मेरी जान आज गाल पर अपने
Jaun Elia
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कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत हुस्न दौलत का साथ देता है
Jaun Elia
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अपने सर इक बला तो लेनी थी मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
Jaun Elia
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