निवाले छीन लेती है हुकूमत अपने हाथों से ख़ुदाया भूख लगना भी यहाँ पर इक सियासत है
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
Shahryar
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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है
Nadeem Farrukh
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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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मौत से मिलना है मुझ को पूछना है इक पता वो पता जो मौत भी देने में शर्मा जाएगी
"Nadeem khan' Kaavish"
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तुम ने जिन-जिन को सताया है किधर जाएँगे तेरे साए भी सताएँगे, जिधर जाएँगे
"Nadeem khan' Kaavish"
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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जिसे इज़्ज़त नहीं दिल की उसे यक़सर ज़ुदा कर दो किसी को फूल देना है तो फिर उस को दिखा कर दो परिंदे मर रहे हैं क़ैद में तुम को ख़बर है क्या ज़रा उन पर तरस खाओ मेरी मानो रिहा कर दो
"Nadeem khan' Kaavish"
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जिस के हाथों में लिखा हूँ मैं, वो मेरे हाथों में नहीं आएगा
"Nadeem khan' Kaavish"
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