फूल से काँटे कोई तो चुनना चाहे कोई हो जो मेरी बातें सुनना चाहे
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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ठंडी हवा की सोहबत में हो रही बारिश है लगता है ये सर्दी की कोई नई साज़िश है
Sahil Verma
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बुझेगी कभी तो मेरी प्यास लगी है मुझे अब यही आस हो जाए मेरी काश वो ही जिसे चाहता हूँ जो है ख़ास
Sahil Verma
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तुम दर्द को भुला दो आँसू चुरा लो उस के शरमाए लाख वो पर तुम तो गले लगाओ
Sahil Verma
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वो अपने ही अंदर में ख़ुद से है लड़ता जो कहता है मुझ को नहीं फ़र्क पड़ता
Sahil Verma
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ये ग़ज़ल ग़ैर मुसलसल है पर इस में मतला है न ही मक़्ता है
Sahil Verma
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