sherKuch Alfaaz

pichhe pichhe raat thi taron ka ek lashkar liye rail ki patri pe suraj chal raha tha raat ko

Related Sher

तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

Tehzeeb Hafi

331 likes

कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी

Ali Zaryoun

321 likes

मुझ सेे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ सेे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

Jaun Elia

174 likes

मन में एक इरादा होता है ताबिश राजा पहले प्यादा होता है ताबिश मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश

Vishal Singh Tabish

75 likes

आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था

Tehzeeb Hafi

223 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Unknown.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Unknown's sher.