रात दिन तेरे साथ कटते थे यार अब तुझ सेे बात से भी गए ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
Kafeel Rana
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अपनी बाँहो से क्यूँँ हटाऊँ उसे सो रहा है तो क्यूँँ जगाऊँ उसे जो भी मिलता है उस का पूछता है यार किस किस से मैं छुपाऊँ उसे
Kafeel Rana
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उस को शहर की सड़कें अच्छी लगती हैं मेरा क्या है मुझ को चलना पड़ता है
Kafeel Rana
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दूर इक सितारा है और वो हमारा है आँख तक नहीं लगती कोई इतना प्यारा है छू के देखना उस को क्या अजब नज़ारा है तीर आते रहते थे फूल किस ने मारा है
Kafeel Rana
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कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
Kafeel Rana
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