साल भर करता रहा हूँ मैं रियाज़त कह ही दूँगा आज होली है तो कह पाया नहीं होली मुबारक
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ता-कयामत प्यासे सब दरिया रहेंगे दरिया की तो तिश्नगी ख़ुद कर्बला हैं
Sabir Hussain
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हम जो थे कभी सिकंदर अपनी दुनिया के उन के हाथों का खिलौना बन कर रह गए
Sabir Hussain
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ग़ुस्सा भी माँ का प्यार से तो कम नहीं मैं मर-मिटूँगा इतनी प्यारी चीख पर
Sabir Hussain
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शोर-ओ-गुल माज़ी के अपने याद कर के तन्हा बूढ़ा घर बिलख कर रो रहा है
Sabir Hussain
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उम्मीद ए विसाल ए जांँ मिसमार हुई नहीं ये दामन-ए-शब अभी दुश्वार हुई नहीं उस ने भी शब-ए-गुज़श्ता क़ैद रखी हवस हम सेे भी बदन की सरहद पार हुई नहीं
Sabir Hussain
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