साँसें दो चार रह गईं लेकिन ख़त तुम्हारा अभी नहीं आया
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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली' अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के
Ali Zaryoun
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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लौट कर नहीं आता कब्र से कोई लेकिन प्यार करने वालों को इंतिज़ार रहता है
Shabeena Adeeb
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फैले हैं क़तरे ओस के घर में रोया हूँ मन मसोस के घर में मैं ने पलकें बिछाई थीं लेकिन चाँद उतरा पड़ोस के घर में
Sandeep Thakur
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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वो ख़ुदा है या है ख़ुदा जैसा जिस के दम पर खड़े हुए हैं हम
shampa andaliib
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उस ने आगाज़-ए-पज़ीराई किया है ऐसे और ठहरने को नहीं करता है दिल अब मेरा
shampa andaliib
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उस को लफ़्ज़ों में बयाँ करना है मुश्किल आज दिल को जिस ख़ुशी ने छू लिया है
shampa andaliib
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ता-उम्र मेरे सर पे रहा ग़म का आफ़्ताब लेकिन कभी हयात ने रुस्वा नहीं किया
shampa andaliib
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तसल्ली हो अगर तिश्नालबों को तो बस दो चार बूँदें ही बहुत हैं
shampa andaliib
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