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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है

Rahat Indori

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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है

Nadeem Farrukh

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हर शे'र हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी तस्वीर बन रही है इक अपने आप तेरी तेरे लिए किसी को इतना दीवाना देखा लगने लगी है मुझ को चाहत भी पाप तेरी

Sandeep Thakur

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ख़ुश रहते हैं हँस सकते हैं भोले भाले होते हैं वो जो शे'र नहीं कहते हैं क़िस्मत वाले होते हैं पीना अच्छी बात नहीं है आते हैं समझाने दोस्त और ढलते ही शाम उन्हें फिर हमीं सँभाले होते हैं

Vineet Aashna

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पुरानी चाहत के ज़ख़्म अब तक भरे नहीं हैं और एक लड़की पड़ी है पीछे बड़े जतन से

Ashu Mishra

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