सिवा उन के कोई भी रास नइँ आया कोई अब तक तभी तो पास नइँ आया
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
Shivam Mishra
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वो मेरा आशियाँ यूँँ सजा के गया जल रही हर शमा' को बुझा के गया
Shivam Mishra
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वसिय्यत में मिली है दुश्मनी हम को यहाँ साहब नहीं चर्चे थे कम वर्ना हमारी दोस्ती के भी
Shivam Mishra
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सब को हैरत रही उन के दीदार से हम को ज़ख़्मी किया अपने किरदार से हाल पूछो तो है ख़ैरियत सब यहाँ हैं मगर याद में उन के बीमार से
Shivam Mishra
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ऐ ज़माने मुझे यूँँ न बदनाम कर हो सके तो मुझे उन के ही नाम कर
Shivam Mishra
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