subh sawere nange panw ghas pe chalna aisa hai jaise bap ka pahla bosa qurbat jaise maon ki
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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जिन के होंटों पे हँसी पाँव में छाले होंगे हाँ वही लोग तुम्हें चाहने वाले होंगे
Parwaz Jalandhari
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पाँव पड़ता हुआ रस्ता नहीं देखा जाता जाने वाले तिरा जाना नहीं देखा जाता
Abbas Tabish
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तुम्हारे दिल की चुभन भी ज़रूर कम होगी किसी के पाँव का काँटा निकाल कर देखो
Kunwar Bechain
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ये ख़राबातियान-ए-ख़िरद-बाख़्ता सुब्ह होते ही सब काम पर जाएँगे
Jaun Elia
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वो पेड़ जिस की छाँव में कटी थी उम्र गाँव में मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं
Hammad Niyazi
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मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया
Hammad Niyazi
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सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की
Hammad Niyazi
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आख़िरी बार मैं कब उस से मिला याद नहीं बस यही याद है इक शाम बहुत भारी थी
Hammad Niyazi
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