सुना है सुन्दरी को घूरने से उम्र बढ़ती है यही है बस ख़ता मेरी कि मैं भी घूर बैठा हूँ
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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मैं ने इक उम्र से बटुए में सँभाली हुई है वही तस्वीर जो इक पल नहीं देखी जाती
Jawwad Sheikh
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कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
Ahmad Faraz
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मछलियाँ आ गई मुहाने पर मिरे हाथों में जाल दे कोई
Shivsagar Sahar
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तुम्हारी लाल चूनर,लाल लाली,लाल बिंदिया को क़सम से देख कर बेजा नशे में चूर बैठा हूँ
Shivsagar Sahar
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दिल पे सिक्का जमा नहीं पाया इतनी हिम्मत जुटा नहीं पाया मेरी इस आशिक़ी पे लानत है उस को पागल बना नहीं पाया
Shivsagar Sahar
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तुम्हें मुझ सेे मोहब्बत हो गई है अरे पहले बताना चाहिए था
Shivsagar Sahar
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तू बिल्कुल ऐसी ही अच्छी दिखती है चेहरे पर मेकअप ही मत लगवाया कर
Shivsagar Sahar
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