तेरे बिन मेरा ख़ुद से यूँॅं तअल्लुक़ टूट जाता है कोई बच्चा कहीं मेले में जैसे छूट जाता है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ज़िन्दगी में मेरी यूँँ इक रोज़ ढल कर देखिए आप थोड़ा दूर मेरे साथ चल कर देखिए रात भर चू मेंगे जानाँ ख़ुद की ही तस्वीर को आप अपना दिल मेरे दिल से बदल कर देखिए
SAMEER TYAGI
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उस ने अपनी आँखों के मय-ख़ाने लगा दिए फिर उस महफ़िल में सब लोग ठिकाने लगा दिए मुझ बिन उदास रहते हो बस इतना कहना था तुम ने कहने में ये बात ज़माने लगा दिए
SAMEER TYAGI
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